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मंदिर का इतिहास
श्रद्धा, भक्ति और अहमदाबाद में भगवान शिव की पवित्र उपस्थिति की स्थापना की एक अलौकिक यात्रा।

दिव्य संकल्प
आशुतोष भगवान शंकर अपने भक्तों के कल्याण हेतु अवन्ती में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। उन्हें भक्तवत्सल भगवान की प्रेरणा से संत गगन बापू ने जनमानस के कल्याणार्थ दृढ़ संकल्प लेकर गुजरात राज्य में साबरमती (कश्यपि गंगा) के पावन तट पर परमश्रद्धेय भक्त महर्षि दधीचि जी की तपोभूमि अहमदाबाद (कर्णावती नगर) में शिव को ही समर्पित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के प्रतीक स्वरूप इस मंदिर की स्थापना की।
श्री महाकाल का यह शिवलिंग प्राकृतिक रूप से नर्मदा नदी में पाए जाने वाले नर्मदेश्वर हैं, जिसके विषय में शास्त्रों में वर्णित है कि ये स्वयं प्राण-प्रतिष्ठित होते हैं और स्थापना के समय इनमें प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती। गृहस्थजन भी इस शिवलिंग का बिना किसी विधि-निषेध के स्पर्श और पूजन-अर्चन कर सकते हैं।
इन सभी शास्त्रीय नियमों को ध्यान में रखते हुए मंदिर में स्थापना के लिए भाद्रपद शुक्ल एकादशी (डोल ग्यारस)) विक्रम संवत 2070 की पावन तिथि दिनांक 15 सितम्बर 2013, रविवार के दिन लाया गया।
लगभग दस वर्ष पश्चात प्रभु प्रेरणा से इस शिवलिंग की गणेश, अंबिका, कार्तिकेय और नंदी के साथ विक्रम संवत 2080 में आषाढ़ शुक्ल तृतीया, बुधवार, दिनांक 21 जून 2023 के दिन पुष्य नक्षत्र और अभिजीत मुहूर्त के संयोग में वैदिक विधि-विधान के साथ महाकाल नाम से प्रतिष्ठापना की गई।
जो भक्तजन उज्जैन जाकर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने में असमर्थ होते हैं, तो उन्हें यहीं भगवान के दर्शन सुलभ हो जाएं, इस विशेष भावना से बापूजी ने मंदिर की संकल्पना की है।

